Friday, 27 September 2024

विष्णु स्तुति - विष्णु पूजा के स्तोत्र - Vishnu Worship Hymns


ॐ शान्ताकारम भुजगशयनम || 

विष्णु इस जगत के रक्षक माने जाते हैं | परमात्मा के तीन रूप हैं | विष्णु , शिव , और ब्रह्मा ये रूप हैं | 

विष्णु को नारायण नाम से भी जुड़ा जाता हैं | नारायण का मतलब पूरे सृष्टि के अंदर व बाहर छाए हुए हैं | 

शिव , विष्णु , ब्रह्मा इन तीनों भगवान को मैं बराबर मानता हूँ |  

क्यों कि ये तीनों एक ही परमात्मा के प्रतीक हैं | 

विष्णु भगवान के पूजा स्तोत्र कुछ यहाँ प्रस्तुत किए जा रहें हैं | 

पूजा आरम्भ माता-पिता के स्मरण , आचार्य वंदन , तथा गणेश श्लोक "सुक्लाम्बर धरम" के साथ किया जाता है | तत पश्चात २४ केशव नाम , लक्ष्मी स्तुति करना है | उसके बाद ये निम्न लिखित विष्णु स्तुति के श्लोक/स्तोत्र पढ़ा जाता है | 

विष्णु स्तुति के स्तोत्र 

ॐ 
शान्ताकारम भुजग शयनम पद्मनाभम सुरेशम 
विश्वाकारम गगन सदृशम मेघ वर्णम शुभांगम | 
लक्ष्मीकान्तं कमल नयनम योगि हृदयानगम्यम 
वन्दे विष्णुम भव भय हरम सर्व लोकैकनाथम || (१)

तात्पर्य :-

एकदम प्रशान्त मूरत रूप में शेषनाग (एक दिव्य सर्प ) की शय्या में आराम करते हुए विष्णु, जिनका नाभि से पद्म ऊगा है (या जिनका नाभि पद्म के समान है ), जो सभी देवताओं के ईश्वर हैं , जो विश्व के आकार में हैं (या तो पूरा विश्व उनका प्रतिक है या उनका शरीर विश्व जैसा है ), आकाश के सामान भी हैं तथा मेघों के रंग वाला अद्वितीय शरीर वाले है , जो लक्ष्मी जी के पति हैं , कमल के सामान आँख पाए हुए हैं , जो योगियों को भी अज्ञात हैं , उन विष्णु भगवान को जो सभी लोकों का एक ही नाथ हैं , उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ | 


मेघ श्यामम , पीत कौशेय वासम ,
श्रीवत्सांकम , कौस्तुभ उद्भासितांगाम ,
पुण्यो पेतम , पुण्डरीकायत अक्षम ,
विष्णुम वन्दे सर्वलोकैक नाथम || (२)

तात्पर्य :-

गहरे बादलों जैसा शरीर छाया , तथा सुनहरे रेशम के वस्त्र पहने हुए , श्रीवत्स चिह्न तथा कौस्तुभ मणि से प्रज्ज्वलमान हे विष्णु ! पवित्रता से छाया हुआ या पवित्रता में विलिप्त शरीर वाले, पुण्डरीक जैसे विकसित आँख वाले विष्णु , जो सर्व लोकों के एकमात्र प्रभु हैं , आप को मेरे प्रणाम |  


स शंख चक्रम , स गदासी शारङ्गम ,
पीताम्बरम कौस्तुभ वत्स चिह्नम ,
श्रिया समेत उज्ज्वलांगम 
विष्णुम वन्दे सर्वलोकैक नाथम || (३)

तात्पर्य :-

शंख तथा चक्र , गदा और शार्ङ्ग धनुर्धारण कर , रेशम वस्त्र तथा कौस्तुभ धारण कर, लक्ष्मी जी के संग देदीप्यमान शरीर वाले विष्णु भगवान ! आप को मेरे प्रणाम जो आप सर्व लोकोंके एकमात्र नाथ हैं | 

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