Friday, 27 September 2024

विष्णु स्तुति - विष्णु पूजा के स्तोत्र - Vishnu Worship Hymns


ॐ शान्ताकारम भुजगशयनम || 

विष्णु इस जगत के रक्षक माने जाते हैं | परमात्मा के तीन रूप हैं | विष्णु , शिव , और ब्रह्मा ये रूप हैं | 

विष्णु को नारायण नाम से भी जुड़ा जाता हैं | नारायण का मतलब पूरे सृष्टि के अंदर व बाहर छाए हुए हैं | 

शिव , विष्णु , ब्रह्मा इन तीनों भगवान को मैं बराबर मानता हूँ |  

क्यों कि ये तीनों एक ही परमात्मा के प्रतीक हैं | 

विष्णु भगवान के पूजा स्तोत्र कुछ यहाँ प्रस्तुत किए जा रहें हैं | 

पूजा आरम्भ माता-पिता के स्मरण , आचार्य वंदन , तथा गणेश श्लोक "सुक्लाम्बर धरम" के साथ किया जाता है | तत पश्चात २४ केशव नाम , लक्ष्मी स्तुति करना है | उसके बाद ये निम्न लिखित विष्णु स्तुति के श्लोक/स्तोत्र पढ़ा जाता है | 

विष्णु स्तुति के स्तोत्र 

ॐ 
शान्ताकारम भुजग शयनम पद्मनाभम सुरेशम 
विश्वाकारम गगन सदृशम मेघ वर्णम शुभांगम | 
लक्ष्मीकान्तं कमल नयनम योगि हृदयानगम्यम 
वन्दे विष्णुम भव भय हरम सर्व लोकैकनाथम || (१)

तात्पर्य :-

एकदम प्रशान्त मूरत रूप में शेषनाग (एक दिव्य सर्प ) की शय्या में आराम करते हुए विष्णु, जिनका नाभि से पद्म ऊगा है (या जिनका नाभि पद्म के समान है ), जो सभी देवताओं के ईश्वर हैं , जो विश्व के आकार में हैं (या तो पूरा विश्व उनका प्रतिक है या उनका शरीर विश्व जैसा है ), आकाश के सामान भी हैं तथा मेघों के रंग वाला अद्वितीय शरीर वाले है , जो लक्ष्मी जी के पति हैं , कमल के सामान आँख पाए हुए हैं , जो योगियों को भी अज्ञात हैं , उन विष्णु भगवान को जो सभी लोकों का एक ही नाथ हैं , उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ | 


मेघ श्यामम , पीत कौशेय वासम ,
श्रीवत्सांकम , कौस्तुभ उद्भासितांगाम ,
पुण्यो पेतम , पुण्डरीकायत अक्षम ,
विष्णुम वन्दे सर्वलोकैक नाथम || (२)

तात्पर्य :-

गहरे बादलों जैसा शरीर छाया , तथा सुनहरे रेशम के वस्त्र पहने हुए , श्रीवत्स चिह्न तथा कौस्तुभ मणि से प्रज्ज्वलमान हे विष्णु ! पवित्रता से छाया हुआ या पवित्रता में विलिप्त शरीर वाले, पुण्डरीक जैसे विकसित आँख वाले विष्णु , जो सर्व लोकों के एकमात्र प्रभु हैं , आप को मेरे प्रणाम |  


स शंख चक्रम , स गदासी शारङ्गम ,
पीताम्बरम कौस्तुभ वत्स चिह्नम ,
श्रिया समेत उज्ज्वलांगम 
विष्णुम वन्दे सर्वलोकैक नाथम || (३)

तात्पर्य :-

शंख तथा चक्र , गदा और शार्ङ्ग धनुर्धारण कर , रेशम वस्त्र तथा कौस्तुभ धारण कर, लक्ष्मी जी के संग देदीप्यमान शरीर वाले विष्णु भगवान ! आप को मेरे प्रणाम जो आप सर्व लोकोंके एकमात्र नाथ हैं | 

Tuesday, 24 September 2024

केशव नाम | विष्णु पूजा /अर्चना 24 नामों के साथ - Worship of Vishnu With 24 Names

 


विष्णु भगवान का एक नाम केशव है |  उनकी पूजा  २४ केशव नामों के साथ किया जाता है | इस प्रक्रिया को अर्चना कहते हैं | 

अर्चना करते वक्त फूल तथा कुमकुम इस्तेमाल कर सकते हैं | एक एक नाम उच्छारण के साथ एक पुष्प या कुमकुमा भगवान को चढ़ाते रहें | 

इन नामों को "केशव नाम" से जाना जाता है | 

  1. ॐ केशवाय नमः 
  2. ॐ नारायणाय नमः 
  3. ॐ माधवाय नमः 
  4. ॐ गोविन्दाय नमः 
  5. ॐ विष्णवे नमः 
  6. ॐ मधुसूदनाय नमः 
  7. ॐ त्रिविक्रमाय नमः 
  8. ॐ वामनाय नमः 
  9. ॐ श्रीधराय नमः 
  10. ॐ हृषिकेशाय नमः 
  11. ॐ पद्मनाभाय नमः 
  12. ॐ दामोदराय नमः 
  13. ॐ संकर्षणाय नमः 
  14. ॐ वासुदेवाय नमः 
  15. ॐ प्रद्युम्नाय नमः 
  16. ॐ अनिरुद्धाय नमः 
  17. ॐ पुरुषोत्तमाय नमः 
  18. ॐ अधोक्षजाय नमः 
  19. ॐ नारसिंहाय नमः 
  20. ॐ अच्युताय नमः 
  21. ॐ जनार्दनाय नमः 
  22. ॐ उपेन्द्राय नमः 
  23. ॐ हरये नमः 
  24. ॐ कृष्णाय नमः 
इन २४ नाम की पूजा पहले करके उस पश्चात आप लक्ष्मी स्तोत्र, तथा विष्णु स्तोत्र पारायण कर सकते हैं | फिर शिव,पार्वतियों का स्तुति, अन्य पूजा के स्तोत्र आपके क्षमता के अनुसार कर सकते हैं | 

Monday, 23 September 2024

लक्ष्मी पूजा स्तोत्र - Lakshmi Worship Hymns (Hindi Meanings)


 लक्ष्मी देवी भाग्य , सौभाग्य तथा मुक्ति प्रदायिनी माता हैं | प्रति दिन इनकी पूजा करने से आपके परिवार में सुखः,समृद्धी , तथा आरोग्य बना रहेगा | 

लक्ष्मी पूजा स्तोत्र प्रतिदिन पूजा के समय पहले आचार्य वन्दन तथा गणेश वंदन के बाद पढ़ा जा सकता है | ये निम्न दिए जाने वाले तीनों श्लोक/स्तोत्र बहुत ही आसानी से उच्चारण कर सकते हैं | 

स्तोत्र के साथ उनका भाव भी प्रत्येक के नीचे दिया जा रहा है | 


लक्ष्मी स्तोत्र 

लक्ष्मीम क्षीर समुद्र राज तनयाम श्रीरंग धामेश्वरीम 

दासीभूत समस्त देव वनिताम लोकैक दीपांकुरीम | 

श्रीमन मंद कटाक्ष लभ्द विभव ब्रहमेन्द्र गंगाधराम 

त्वाम त्रैलोक्य कुटुम्बिनीम सरसिजाम वन्दे मुकुन्द प्रियाम || (१)


तात्पर्य :-

माता लक्ष्मी जी ! क्षीरसागर की पुत्री , श्रीरंग धाम पर बसने वाली , अनेक परिचारिका ओम तथा अन्य प्राणी से सेवा पाने वाली , समस्त लोक के एक ही मात्र दिव्य ज्योती माने जाने वाली माँ ! श्रीमन विष्णु, ब्रह्मा, शिव के प्रसन्न कटाक्ष के ऐश्वर्य से आप तीनों लोक वास करती हैं ! हे सरोवर में जन्मी , मुकुन्द के लाड़ली माता ! आप को प्रणाम |\


मातर नमामि , कमले , कमलायताक्षी 

श्रीविष्णु हृतकमल वासिनी विश्वमाता 

क्षीरोदजे कमल कोमल गर्भ गौरी 

लक्ष्मी प्रसीद सततम नमताम शरण्ये || (२)


तात्पर्य :-

हे माते ! कमल फूल जैसी कोमल, सौम्य, तथा सुन्दर और कमल पंखुड़ियों जैसी आँख पाकर विष्णु भगवान के ह्रदय में बसने वाली माता ! आप को नमन करता हूँ | 

हे क्षीर सागर से जन्मी , तथा कमल के कोमल गर्भ में आसीन होने वाली गौरी माँ ! आप की शरण में माथा टेकता हूँ, हर वक्त दया करते रहें !


वन्दे पद्मकराम , प्रसन्न वदनाम, सौभाग्य दाम , भाग्यदाम ,

हस्ताभ्याम अभय प्रदाम , मणि गणेर नाना विधैर भूषिताम ,

भक्ताभीष्ट फल प्रदाम , हरिहर ब्रह्मादिभिः सेविताम ,

पार्श्वे पंकज , शंख , पद्म , निधिभिर युक्ताम , सदा शक्तिभिः || 

सरसिज नयने , सरोज़ हस्ते , धवळ तरामसुक गन्ध मालय शोभे ,

भगवति हरि वल्लभे ! मनोज्ञे ! त्रिभुवन भूत करि प्रसीद मह्यम || (३)


तात्पर्य :-

हे माँ ! पद्म जैसी हाथ पाकर प्रसन्न मुख रहने वाली , आपको नमन करता हूँ | हे सौभाग्य प्रदान तथा भाग्य प्रदान करने वाली माँ ! अपने हाथों से अभय प्रदान करें ! अनेक रंग-बिरंगे मणियों से अलंकृत होकर भक्तों के कामनाएं पूरी करते हुए , विष्णु, शिव, तथा ब्रह्मा आदि सब देवों से सेवा पाते हुए , अपने बग़ल में चक्र , शंख , पद्म , तथा संपत्ति धारण कर , सर्वदा शक्ति रूपिणी रक्षा करें | 

हे कमल आँख वाली, कमल जैसी हाथों वाली, दूध जैसी सफ़ेद महकते हुए फूलों की मालाओं से सुशोभित माँ ! हे भगवती , विष्णु पत्नी ! भक्तों के मन की बातों को जानने वाली , तीनों लोक के प्राणियों की हमेशा रक्षा करते रहें ! 


मैं नित्य प्रतिदिन सुबह पूजा में "शुक्लाम्बरधरम। .. " के बाद २४ केशव नाम जाप करता हूँ | उसके बाद "शान्ताकारम भुजग शयनम। .. " स्तोत्र पढ़ कर तब लक्ष्मी स्तोत्र पारायण करता हूँ | फ़िर अन्य पूजा के पाठ करता हूँ | 

लक्ष्मी पूजा अनुदिन करते रहने से धन, धान्य, आरोग्य , तथा परिवार में शान्ति कायम रहेगा | 




 

Tuesday, 17 September 2024

हनुमान पूजा स्तोत्र - Hanuman Worship Prayers


हनुमान जी की पूजा करते वक्त इन सभी स्तोत्रों का पठन कर सकते हैं ! 


श्री आँजनेयम , प्रसन्न आंजनेयम ,    

प्रभा दिव्य कायम , प्रकीर्ति प्रदायम ,

भजे वायुपुत्रम , भजे वालगात्रं ,

भजेहम पवित्रम, भजे सूर्यमित्राम ,

भजे रूद्र रूपम , भजे ब्रह्म तेजाम || 


ॐ नमो श्री आञ्जनेय स्वामिने नमः || (१)

तात्पर्य :- 

हे आञ्जनेय ! आप प्रसन्न हों | प्रकाश से जगमगाते हुए, यश प्रदान करें | 
हे वायु देवता के पुत्र , लम्बे गर्दन वाले , पवित्र मन वाले, हे सूर्य भगवान के मित्र , भयंकर रूप धारण करने वाले , ब्रह्मा जी के तेज़ वाले , आप को मैं नमन करता हूँ | 


आञ्जनेयम , अति पाटल आननं ,
कांचनाद्रि कमनीय विग्रहाम 
पारिजात तरु मूल वासिनम 
भावयामि पवमान नन्दनम || (२)

तात्पर्य :-

हे आञ्जनेय ! (अंजनी के पुत्र), उज्जवल चमकते हुए मुख मंडल वाले ! सोने की पहाड़ जैसी शोभनीय बदन के स्वामी ! पारिजात के नीचे रहने वाले वायु पुत्र ! आप ही के ध्यान करता हूँ !


मनोजवं मारुत तुल्य बेगम , जितेन्द्रियम , बुद्धिमतां वरिष्ठम | 

वातात्मजं , वानर यूध मुख्यम , श्रीराम दूतं , शिरसा नमामि || (३)

तात्पर्य :-

मन के बराबर तीव्रता तथा वायु के बराबर तेज़ से चलने वाले , इन्द्रियों को जीत कर , बुद्धि में श्रेष्ट वाले , हे वायु के पुत्र , वानर योद्धाओं में प्रथम , श्री राम जी के दूत , मैं आप के आगे नत मस्तक हूँ ( शिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ ) 


अतुलित बलधामम , स्वर्ण शैलाभ देहम 
दनुज वन कृशाणुम , ज्ञानिनाम अग्रगण्यम | 
सकल गुण निधानाम , वानराणा मधीशम 
रघुपति प्रिय भक्तं , वातजातम नमामि || (४) 

तात्पर्य :-

हे हनूमान ! आप का बल असीमित है , देह आप का सोना जैसा प्रकाशमान है , असुरों के झुण्ड आप के सामने घास के तिनके जैसे हैं , ज्ञानियों में आप अव्वल माने जाते हैं , सभी गुणों के आप आश्रय हैं (ख़जाने जैसे हैं ) , वानरों के अधिपति हैं , हे श्री राम के भक्त , वायु पुत्र , आप को अंजलि समर्पित करता हूँ !


गोष्पदी कृत वाराशिम , माशकी कृत राक्षसं 
रामायण महामाला रत्नम , वन्दे अनिलात्मजं | 
यात्र यत्र रघुनाथ कीर्तनम , तत्र तत्र कृत मस्तकांजलिम 
भाष्ण वारि परिपूर्ण लोचनम , मारुतिम , नमत राक्षतान्तकम || (५ )

तात्पर्य :-

मैं उन हनुमान जी को नमन करता हूँ जिन्होंने समुन्दर को एक गाय के पैर से बने गड्ढ़े के बराबर लाँघ लिए , तथा राक्षसों को मच्छर के बराबर कुचल दिए | हे हनुमान!आप रामायण माला के रत्न हैं | जहाँ जहाँ श्री राम के कीर्तन हों तहाँ तहाँ मस्तक झुका कर , आँखों में हर्षोल्लास के पानी भरे हुए , अंजलि घटाने वाले हे हनुमान ! राक्षसों के विनाशक ! आप को नमन करता हूँ | 


Sunday, 15 September 2024

गणेश पूजा स्तोत्र व श्लोक


गणेश की प्रति दिन पूजा करने से विघ्न तथा समस्याओं से मुक्ति प्रदान करेंगे | ऐसा हम सब का विश्वास है | मैं भी रोज़ पूजा के समय गणेश जी का स्मरण करते हुए निम्न दिए गए स्तोत्र पठन करता हूँ | 

बुधवार का दिन गणेश जी का माना जाता है | अतः उस दिन मैं गणेश भजन भी करता हूँ | 
भजन में गणेश जी का नाम जप करता हूँ | 

ॐ ग़म गणपतये नमः | इसी को ११, २१, या १०८ बार जाप कर सकते हैं | 


गणेश श्लोक 


शुक्लाम्बरधरम , विष्णुम् , शशि वर्णम , चतुर्भुजम |

प्रसन्न वदनम् , ध्यायेत् सर्व विघ्नोपशान्तये || (१ )

तात्पर्य :-

श्वेत वस्त्र पहने हुए सर्वत्र विराजमान , चांदिनी जैसी रूप वाला , चार भुजाएँ धारण कर, प्रसन्न मुख़ रहने वाले , सकल विघ्न या रुकावटों को भगाने वाले गणेश की स्मरण करता हूँ | 


गणेश स्तोत्र 


ओम श्री विघ्नेश्वराय  नमः

ओम श्री विनायकाय नमः

ओम श्री एकदन्ताय नमः

ओम श्री गजाननाय नमः

ओम श्री गणेशाय नमः (१ )


वक्रतुण्डं महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः |
निर्विघ्नम् कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा || (२ )

तात्पर्य :-

घुमावदार सूंड (हाथी का सूंड ), तथा विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूरज के प्रकाश वाले हे गणेश ! हर वक्त हमारे कामों में उत्पन्न होने वाले व्यवधान व बाधाओं को हटाते रहने की विनती करता हूँ |

यहाँ पर एक और बात ध्यान देना होगा | "वक्र तुण्ड" का अर्थ एक और भी है | 
वक्रों को तुण्ड करने वाला | गणेश भगवान वक्रों को यानी विकृत बुद्धियों को तोड़ने वाले हैं | 
विकृत या दुष्ट शक्तियों को दण्डित कर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं | 


गजवक्त्रम, सुर श्रेष्ठम, कर्ण चामर भूषितम,
पाशांकुश धरम देवम , वन्देहम गण नायकम || (३ ) 

तात्पर्य :-

हाथी के दाँत पा कर, देवताओं में श्रेष्ट होने वाले गणेश ! चामरों जैसी बड़े कानों से सुसज्जित , तथा पाश और अंकुश धारण करने वाले हे गण नायक! आपको सदैव प्रणाम |   


विघ्नेश्वराय, वरदाय, सुरप्रियाय, 
लम्बोदराय, सकलाय, जगतजिताय | 
नागाननाय, श्रुतियज्ञ विभूषिताय,
गौरीसुताय, गण नाथ नमो नमस्ते || (४ )

तात्पर्य :- 

हे विघ्नों के ईश्वर , वर देने वाले प्रभू ! आप देवताओं के प्रिय हैं , लम्बे उदर वाले हैं , सब कुछ आपके अधीन है, जगत को जिताने वाले हैं , सांप जैसी हाथी के मुख वाले , सभी शास्त्र तथा यज्ञों के विशारद व आभूषण हैं आप , हे माता गौरी के पुत्र , गणों के देव , मेरे प्रणाम स्वीकार करें | 


अगजानन पद्मारकम , गजाननम , अहर्निशम | 
अनेक दन्तं भक्तानाम, एक दन्तं उपास्महे || (५ )

तात्पर्य :-

माता गौरी के मुखमण्डल से उभरते हुए किरणों से प्रकाशित हे गजानन ! आप दिन-रात अनेक दांतो वाले भक्त जनों की रक्षा में लगे रहते हैं | हे एक दन्त ! मैं आप ही को पूजता हूँ | 


Thursday, 12 September 2024

पूजा विधि - घर में पूजा करने के सरल उपाय - Daily Worship at Home Tips

 


प्रति दिन घर पर पूजा करने के कुछ सरल व आसानी तरीके मैं यहाँ प्रस्तुत करना चाहूंगा | 

मैं एक वैष्णव ब्राह्मण हूँ तथा कई साल से अपने घर पर रोज़ प्रातः काल पूजा करता आ रहा हूँ | तो पूजा करते करते मुझे आदत हो गया तथा कभी कभी समय के अभाव में कुछ आसानी तरीकें ढूंढना पड़ता था | इस तरह एक क्लुप्त समय के अन्दर पूजा करने का विधि निकाल सका | अब आपसे उस तरीके को बाँटता हूँ |  

मेरे सुझाव को आप अपने रीति रिवाज़ के अनुसार तथा समय के अनुसार ढल सकते हैं | 

पूजा सामग्री 

आप इतना तो जानते ही होंगे कि पूजा करने के लिए एक घर के अंदर एकान्त तथा परिशुद्ध वातावरण बनाना चाहिए | भगवान की मूर्ती अथवा तस्वीर रखना चाहिए | और जरूरतों को मैं बता रहा हूँ | 
  • पानी के लिए दो या एक छोटा सा जल पात्र | एक भगवान के निमित्त तथा एक अपना आचमन वग़ैरह के वास्ते | ताम्बा या पञ्च लोहा पात्र बेहतर माना जाता है | स्टील वाला भी ठीक ही है | 
  • एक गहरा प्लेट जिस में पानी को डाला जाता है | यह पात्र भी उसी लोहे का रख लीजिएगा | 
  • एक या दो दिए जलाने वास्ते दिया दान | ये पीतल के हों तो बेहतर है अथवा स्टील, चाँदी के भी हो सकते हैं | 
  • दिया जलाने  के लिए तेल, रुई की बत्ती, तथा दियासलाई | 
  • भगवान को एक मन्दिर में या अलमारी में अथवा जमीन पर कुछ बिछाके भी रख सकते हैं | 
  • पूजा-पाठ के किताब हों तो सुविधा होगा | न हो तो इंटरनेट से सेव करके रख सकते हैं | 
  • पूजा के इस्तेमाल के लिए अगरबत्ती, कपूर | 
  • भगवान के भोग के लिए फल, गुड़ | मैं दो केला या थोड़ा गुड़ चढ़ाता हूँ | 
  • प्रसाद के लिए एक स्टील प्लेट |  

पूजा विधान 

  • दिया जलाकर भगवान को नमस्कार करें | 
  • मैं पहले माता पिता को तथा अपने बचपन के गुरुओंको मन में प्रणाम कर तब पूजा आरम्भ करता हूँ | 
  • भगवान की पूजा के लिए रखेगए बर्तन में पानी भर कर उसे अपनी दाहिने हथेली से ढक कर  पवित्र करने वाला मंत्र उच्चारण करें | " गंगे च यमुने चैव गोदावरी , सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी जलेस्मिन सन्निधिम कुरु || ". 
  • अब उस पानी को अपने दाहिने अंघूठे से सिर पर तीन बार छिड़क लीजिए | 
  •  एक नया स्पून पूजा के लिए ऱख लीजियेगा | उस स्पून से उपरोक्त बर्तन में से पानी निकाल कर भगवान को अर्घ्य के वास्ते उनके दाहिनी हाथ को दिखा कर पानी पूजा प्लेट में डाल दीजिए | 
  • फिर से स्पून में पानी निकाल कर पाद्य समर्पित करते हुए भगवान के पैर को छुवा कर थाली में डाल दीजिए |
  • अब फिर पानी निकाल कर भगवान के नहाने के वास्ते उनके चारों ओर घुमा कर थाली में डाल दीजिए |  
  • अर्घ्य, पाद्य, स्नान के बाद भगवान को आचमन समर्पण करना है | आचमन तीन बार दिया जाता है | अतः चम्मच से तीन बार पानी लेकर भगवान के मुँह की ओर दिखाते हुए थाली में डाल दीजिए |\
  • अब नमस्कार कर के स्तोत्र पाठ करना है | आप के जानकारी तथा सुविधा के अनुसार ३,४ स्तोत्र पठन करें | 
  • अगर अर्चना भी करना चाहें तो भगवान का १०८ नाम पठन करते हुए पुष्प, कुम्कुम से पूजा कर सकते हैं | 
  • स्तोत्र पारायण के पश्चात धूप जलाकर दिखाना है | दो अगरबत्ती जला कर उस धुप भगवान के चारों ओर घुमा दीजिए | 
  • अब दीप दर्शन कराना है | दीप की ज्वाला को अपनी हथेली से भगवान की ओर तीन बार दिखा दीजिए | 
  • नैवेद्यम समर्पण करना है | फल और गुड़ भगवान के मुख की ओर दिखाते हुए जैसे बच्चे को खिलाते हैं उस तरह प्यार से खिला दीजिए | 
  • खिलाने के बाद हाथ, पैर धोना है | चम्मच से पानी लेकर हाथ और मुख की और दिखा कर थाली में डालिए | 
  • अब फिर से आचमन यानि पानी पिलाना है | चम्मच से तीन बार पानी लेते हुए भगवान को पिलाते हुए थाली में डाल दीजिए | 
  • मङ्गल आरती के लिए या तो कपूर जला कर कर सकते हैं या दीप से ही आरती दे सकते हैं | आरती गाना हो तो गा लीजिए या केवल डीप को को भगवान के चारों ओर तीन बार घुमा दीजिए | 
  • अब पूजा सामप्त हो गया है | नमन कर के प्रसाद ग्रहण करें |\ 

Saturday, 7 September 2024

स्वागतम - Welcome

प्रिय आत्मीय जनों,

आप सभी का स्वागत करते हुए, मेरा सस्नेह नमस्कार।

इस ब्लॉग में मेरा यह प्रयास रहता है कि मैं हम सबकी दिनचर्या और दैनिक जीवन से जुड़े कुछ सादी सीधी विषयों पर चर्चा करूँ।

हमारा हर दिन उठने-बैठने, पूजा-पाठ, रसोई और जीवन के तमाम छोटे-बड़े कामों में बीतता है। इन्हीं गतिविधियों को सरल बनाने के लिए मैं अपने जीवन के अनुभव, कुछ बेहतरीन उपाय और विचार आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

मैं एक दक्षिण भारतीय और सेवानिवृत्त लेखक हूँ | संभव है कि मेरी हिंदी भाषा या व्याकरण में कुछ कमियाँ रह जाएँ। मुझे पूरा विश्वास है कि आप बड़े मन से मेरा साथ देंगे और निरंतर मेरा प्रोत्साहन करेंगे।

सबसे पहले मैं कुछ पूजा स्तोत्रों से शुरू करने जा रहा हूँ | 

हर दिन भगवान की पूजा से शुरू होता है | अतः प्रतिदिन पूजा करते वक़्त पढ़ने योग्य कुछ सरळ स्तोत्र उनके परिभाषा सहित मैं प्रस्तुत करूंगा | 

इन स्तोत्रों को प्रस्तुत करने के बाद, कुछ महत्व पूर्ण त्यौहार व पर्वों के बारे में बात करूंगा | 

तदनन्तर अन्य जीवन से जुड़े हुए विषयों पर बात करना शुरू करूंगा | 


मुख्य गमानिका: 

आप सबसे निवेदन है कि कृपया दाई ओर जो लेबल्स (labels) दिखाई पड़ते हैं उन पर क्लीक करके सम्बंधित स्तोत्र व अन्य विषयों को पढ़ें |